Thursday, 16 July 2015

कठपुतली.......

मैने देखा है
कठपुतली का खेल
खेल में कहानी
कहानी
में राजा और रानी
जब ऊपर परदे से कोई डोर हिलाता था तो कठपुतलियां
तमाशा करती उसके हाथ की डोर उर संगीत की धुन 
से कठपुतलियों का खेल सच लगने लगता
आज घर की दीवार पे सजावट के रूप में ही काम आती है
मेने उनको उतार कर
आपनी उंगलियो में लटका लिया ........और फिर देर तक बच्चों को खेल दिखता रहा इक कहानी के साथ ............और फिर उन्हें दीवार पे लटका कर नम आँखों से सोचता रहा
हमारी डौर भी किसी के हाथ में है
कब क्या हिलाये
क्या बनाये
और
कब तोड़ दे
और हम दीवार पे इक तस्वीर बन
के लटक जाये
क्या पता ................

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