Thursday, 16 July 2015

पहले जैसा.......

मै पहले जैसा कहा हूँ
जो पहले था
जब कभी भी मै दीवार पे लटकी बचपन की तस्वीर के आगे से गुजरता हूँ तो मन में ख्याल आता है की मै पहले जैसा नही रहा
ख़ैर कोई भी नहीं रहता पहले जैसा
मित्र माँ बाप पत्नी और मेरे बच्चे भी अक्सर और मै खुद भी कहता हूँ अपने आप से
की मै पहले जैसा नहीं रहा
मर गया इक हादसे में मै
और मेरा भोलापन अब कोई नहीं तोतली जुबान से पुकारता कोई नहीं  देख के छुपता बल्कि मै ही अक्सर छुप के देखता हूँ  कागज की किश्ती धन दौलत कमाने के चक्कर मे ही समुन्द्र में डूब गई बारिश का पानी भी आज समस्या ही लगता है नानी दादी भी नहीं रही और मै भी खुद कितने रिश्तो में ढल गया हूँ
देखा कितना बदल गया हूँ
मै ..............................शायद तुम भी
तो फिर
बस एक याद के सहारे अपनी बचपन की तस्वीर के आगे खड़े होकर या फिर किसी रोते हुए बच्चे को हँसा कर 14 nov बाल दिवस के रूप में मना ले
या फिर हर दिन हो बाल दिवस आपने दिलो में बचपन को जिन्दा रखके .........चेहरों पे हल्की सी मुस्कान के साथ
                                                 आपका बिट्टू
                                             या
                                आज का sanjivv shaad

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