Thursday, 16 July 2015

घर लौट आओ

तुम जहाँ कही भी हो
बस घर लौट आओ
क्योकि
ता उम्र सफर में  ही गुजरी है हम आपने शहर में होकर भी आपने घर में नही होते
घर और दर
आना ही पड़ता है
अक्सर मैं शाम को या देर रात को घर लौटता हूँ
और घर में होकर भी घर में नही होता
तब वो मेरे पास आती है और धीरे से कान में कहती है
तुम जहाँ कही भी
shaad सहाब बस घर लौट आओ........
और आज सारा दिन घर पे हूँ उसके पास

No comments:

Post a Comment