Thursday, 16 July 2015

उदास.....

तुम उदास क्यों हो
पूछा है उसने मुझ से ......
बस .....और 
कहा की
कभी कभी उदास भी होना चाहिये
जरूरी है उदासी खालीपन
और मौन
अहसास ...................
कुछ न समझ आना
और तेरा पुछना
क्यों........
और
मैं
शीशे के सामने खड़ा हो गया
और मुझे इक जबाब मिला की
मैं उदास क्यों हूँ
मै उदास हूँ परेशान नही
मेरे आसपास है मेरी कविता मेरा गीत गजल और कहानियाँ
और कलम....और मेरे चेहरे पे ख़ुशी आई
तभी उसने पलट के पूछा की
तुम इतने खुश क्यों हो........
और मैने अपनी कलम की और देखा
उदासी ख़ुशी के फर्क को जाना तो लिखा की मेरे पास उदास और ख़ुशी दो शब्द  और उसके पास इक ही शब्द
क्यों..........क्योकि वो मेरा सच्चा मित्र भी है जो
फ़िक्र करता है
शुक्रिया मित्रो आप मुझे समझते हो और
जानते ही नही पहचानते भी हो
आपका 
Sanjivv Shaad

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