Thursday, 16 July 2015

शुभ रात्रि.....

मित्रो
हर रोज ही रात हो जाती है
ताकि सवेरा हो सके
और हम सोते है उठने के लिए
और उठ के फिर सोने के लिए
बस
इक चक्र
और
फिर इक गहरी रात
जिसका कोई सवेरा नहीं
शायद
इस लिए कभी कभी रात्रि भी शुभ होती है ।।

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