Thursday, 16 July 2015

काला दिन.......

कत्ल ..............................और मौत में अंतर है
श्रदा के रूप ही ये मोम बत्ती
क्योकि
दिल है मोम
जो
जल रहा है
उदास है
बस
मेरे शब्द गुम है  और .....अर्थ बेअर्थ
ज़िन्दगी की
समय पे मौत तो कबूल है
जिंदगी का कत्ल  नहीं .......
और कल स्कुल बन्द रहेगा
और कभी शायद खुले भी ना बस मैं तुम्हे मेरे बच्चे अनपढ़ ही देखना चाहता हूँ हर पल आँखों के सामने घर के आँगन में सबके बीच ............नहीं चाहिये कोई भी तालीम
मेरी मौत होने तक

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