Thursday, 3 September 2015

आप......

आप.........?
पहले मैं
आपके लिए सिर्फ आप था
फिर तुमने मुझे तुम कहा
और इक दिन
तुम से तू तक आ गए
देखा पहले तो सिर्फ तुम जानते थे
और आज
पहचानने लगे हो........ इसलिए
कभी कभी सोचता हूँ
रंग
से रूप
और
फिर
रूप से जिस्म से घर संसार
धीरे धीरे
महोब्बत  भी चोंका चुल्ला हो  जाती है
वरना सारी उम्र अधूरी ही रहती है
सिर्फ
आप बन कर ..........?

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