Tuesday, 15 September 2015

हम दोनों

बिछड़ते हुए
उदास
परेशान
गम  और कुछ अनमोल यादे
है
लेकिन फिर भी जमाने से मुस्करा के मिलगे
हम दोनों
ये
तुमने कहा था.......
इक दूसरे के हक में
दुया करेगे
हम दोनों
ये
मैने कहा था.........
दुःख सुख छुपा के
हम अंचल में समा लगे
याद जब आयेगे इक दूजे को
तो छुप के रो लगे
ये
हम दोनों ने मिल कर कहा था......
उनकी बीती कहानियो के हसीन सपने कहीे टूट न जाये शायद इसलिए वो
खुली आँखों में सो जाते है
कविता गीत और  गजल कहानियो के शब्दों में मिलते है अर्थ बन कर
दूर रहकर भी कितने पास होते है
आजकल दोनों.....
शायरी पढ़ के हम दोनों की
ये
लोगो ने कहा है ।।

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