Thursday, 26 May 2016

कण कण

कण
से
रंग
रंग से रूप
रूप से आकर
आकर से अंहकार
अंहकार से काम
काम से क्रोध
क्रोध से लोभ
लोभ से  मोह
मोह से
कल्पना और कल्पना में कल सिर्फ आने वाला कल
जल वायु पृथ्वी आकाश और आग
और आग के बाद
रेत के कण
जीवन इक
चक्र है
जो घूमता है
कण से कण तक
और कण कण में जीवन कण कण की मौत.....

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